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वास्तविकता की कसौटी पर खरा , सामाजिक क्रांति की ओर अग्रसर , नव चेतना प्रदान करने वाला ब्लॉग ..

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JAMALUDDIN ANSARI


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हदीस-शास्त्र !

Posted On: 28 Apr, 2013  
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मानव जीवन की सार्थकता

Posted On: 19 Jul, 2012  
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Others लोकल टिकेट में

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उसको करते सतसंगत देखा

Posted On: 22 Apr, 2012  
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Others मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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भ्रष्ट हम नहीं हमारी मानसिकता है …….

Posted On: 21 Apr, 2012  
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जीने की तमन्ना पर कैसे जीयूं

Posted On: 10 Apr, 2012  
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तीन बातें

Posted On: 22 Mar, 2012  
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मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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हिन्दी SMS

Posted On: 15 Feb, 2012  
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मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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26 जनवरी पर दिलचस्प जानकारियां ( Interesting Facts about 26 January)

Posted On: 25 Jan, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale ji , नमस्कार , आप जैसे महानुभावों का साथ मिला तो दोस्त और दुश्मन में फर्क पता चल जायेगा ,खुदा ने सारी चीजें बेहतर जरुर बनाई है . फिर भी कुछ चीजे ज्यादा महत्त्व पाती हैं और कुछ कम , वजह है उनकी उपयोगिता का , आप ने कहा इन्सान किससे रहम की भीम मांग रहा है ? इन्सान ; इन्सान से ही परेशान है क्योकि वह अपने अक्ल से सही दिशा में काम नहीं कर रहा है , आप ने कहा कि अक्ल तो सबमे है इंसान हो या जानवर. बड़ा फर्क तो शरीर की बनावट का ही है, तो मै ये कहना चाहूँगा कि इन्सान अपने अक्ल का उपयोग करना बेहतर तरीके से जनता है ,और बुलंदियों को प्राप्त कर रहा है , लेकिन जानवर इन्सान से भी बड़ा शरीर लेकर इन्सान का गुलाम बना हुआ है , धन्यवाद

के द्वारा: JAMALUDDIN ANSARI JAMALUDDIN ANSARI

अंसारी जी, मै कई जगह असहमत हूँ.पहला तो यही की आपने कहा है की किसी पर अपनी बात थोपना नहीं चाहिए और आपने इतनी साड़ी बातें हम पर थोप दी हैं. हा हा हा हा. सत्य की आपकी परिभाषा गलत है सत्य सदैव कडवा नहीं हो सकता और यदि कडवा है तो वह सिर्फ दवाई के सामान ही है. दूसरा संसार में दोस्ती की कई मिसालें कायम हैं अवसरवादियों को दोस्त नहीं कहा जाता.हाँ जिंदगी में हम लाखों करोड़ों लोगों से मिलते हैं मगर जीवन में एक दोस्त मिल पाना बहुत कठिन है. खुदा की बनायी सभी चीजें बेहतरीन हैं. मगर इंसान को मै कम बेहतरीन मानता हूँ क्यों की इंसान के ज्यादातर काम कुदरत के विपरीत ही जाते हैं. इंसान किससे रहम की भीख मांग रहा है. और अंत में मै यही कहूंगा की अक्ल तो सबमे है इंसान हो या जानवर. बड़ा फर्क तो शरीर की बनावट का ही है.इसकी व्याख्या बड़ी होगी इसलिए मै इस पर कुछ नहीं बोलता. आपका विचार दुनिया को अच्छी बातें सिखाने का है.सब मिल कर आगे बढ़ने का है तो वह पूरी तरह आप के आलेख के माध्यम से हम तक पहुँच रहा है. अच्छे सन्देश के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया.

के द्वारा: akraktale akraktale

दिनेश जी , लेख को सराहने के लिए शुक्रिया , आप ने लिखा है की एक भी कोई प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे की ईश्वर ने मनुष्य की रचना की है। मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ , मेरा मानना है की हर एक चीज को शत प्रतिशत प्रमाणिकता की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता है , कुछ चीजे अपवाद भी होती है . यह सच है की विज्ञानं ने काफी उन्नति कर ली है लेकिन यह भी सच है की विज्ञानं की खोज करने वाला कोई जानवर नहीं बल्कि इन्सान ही है क्योंकि मैंने यही जिक्र किया है की खुदा ने इन्सान को नेमत के रूप में अक्ल दिया है जो किसी अन्य प्राणी में नहीं है . अगर इन्सान में अक्ल नहीं होता तो वह भी एक जानवर से कम नहीं होता . जहाँ तक प्रमाणिकता की बात है तो यह भी साबित नहीं होता है की इन्सान को विज्ञानं ने ही अक्ल दिया है .क्योकि मानव की उत्तपत्ति के साथ ही विज्ञानं की भी उत्पत्ति होती है ; अगर आप के पास इसके प्रमाण हों तो कृपया करके हमें बताने का कष्ट करें मैं आप का सदा आभारी रहूगा . धन्यबाद

के द्वारा: JAMALUDDIN ANSARI JAMALUDDIN ANSARI

जमाल जी,नमस्कार। आपकी शिक्षाप्रद एवं अनुकरणीय बातें मेरे साथ-साथ अन्य लोगों पर भी असर छोड़ेगीं,किन्तु क्षमा चाहता हूँ कि मैं तर्क के आधार पर एक बात से सहमत नहीं हो सकता-- कि इंसान खुदा कि सबसे बेहतरीन नेमतों में से एक है, क्योंकि तर्क एवं अनगिनत प्रमाणों के आधार पर मेरा मानना है कि खुदा ने इंसान को नहीं बनाया है, अपितु डर अज्ञानता के संगम से खुदा ईश्वर या गोड की कल्पना हुई है। ऐसा एक भी प्रमाण नहीं है कि ईश्वर ने मनुष्य की रचना की है। कृपया मेरी बातों को अन्यथा न लेकर तर्क बुद्धि एवं विवेक से विचार करके उचित निर्णय लें।मेरा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि मात्र सत्य जानने की जिज्ञासा है।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik




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